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शनिवार, 7 अप्रैल 2012

खुशी से जीने के लिए


मुझे अपना
रोता हुआ चेहरा मत
दिखाओ
शीशे में खुद को कई बार
रोते हुए देख चुका हूँ
मुझे अपनी व्यथा मत
बताओ
मैं अपनी व्यथा
दुनिया को कई बार बता
चुका हूँ
अपनी समस्याओं का
बखान मतों करो
मैं कई बार अपनी
समस्याओं की चर्चा
कई लोगों से कर चुका हूँ
दिखाना ही है तो अपना
हँसता हुआ चेहरा दिखाओ
समस्याओं का समाधान
बताओ
व्यथा कम करने के उपाय
सुझाओ
नहीं चाहता जो मैं 
करता रहा
वो तुम भी करो
मुझे कोई लाभ नहीं हुआ
तुम्हें कैसे होगा
आओ अब मिल कर हँसें
समस्याओं से बचने पर
चर्चा करें 
खुशी से जीने के लिए
मंथन करें
दूसरों को भी खुश 
रहना सिखाएँ
04-03-2012
293-28-03-12

3 टिप्‍पणियां:

  1. स्वयं प्रसन्न रहें, औरों को भी रखें।

    उत्तर देंहटाएं
  2. ख़ुशी तो सदा यही कहती,,ढूढें है मुझे कहाँ...मै तो हूँ संग तेरे सदा....
    सुंदर रचना...

    उत्तर देंहटाएं