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बुधवार, 4 अप्रैल 2012

मेरा दुश्मन मैं खुद हूँ

मेरा दुश्मन मैं खुद हूँ
आदत से मजबूर हूँ
सच कह देता हूँ
उनकी नाराजगी का
बहाना बन जाता हूँ
उन्हें खो देता हूँ
बहुत कोशिश कर ली
आदत नहीं बदल 
पाता हूँ
खुदा का फरमान 
समझ
फैसला कबूल करता हूँ
नया साथ ढूँढने
निकल पड़ता हूँ
03-03-2012
285-20-03-12

5 टिप्‍पणियां:

  1. खुद का दुश्‍मन और नाराजगी का बहाना.....खूब

    उत्तर देंहटाएं
  2. क्या नया क्या पुराना .......अब भी सब कुछ एक सा ही हैं ...

    उत्तर देंहटाएं
  3. मेरा दुश्मन मैं खुद हूँ
    आदत से मजबूर हूँ....

    bahut khoob.....!!

    उत्तर देंहटाएं
  4. sachhi baat ye hai ki sach sab ko pasand nahin aata,
    aur achchhi baat ye hai ki aap haar nahin maante ...
    safar mein badhte chale jaate hain . Mujhe lagta hai aisa hi hona bhi chahiye :-)

    उत्तर देंहटाएं