ADVERTISEMENT

Bookmark and Share

Register To Recieve Latest Poems On Your Email or Mobile

Enter your email address:

Click Here To Subscribe On Mobile Bookmark and Share

रविवार, 1 अप्रैल 2012

कब रुकेंगे अश्क आँखों से


कब रुकेंगे अश्क आँखों से
रुक जायेंगे यादों के मंजर
कब काली रात गुजरेगी
आराम मिलेगा ख़्वाबों से
कब ज़िन्दगी में सहर होगी
खिलेगी धूप मन के आँगन में
कब इनायत खुदा की होगी
मुलाक़ात होगी सुकून से
02-03-2012
274-09-03-12

3 टिप्‍पणियां:

  1. प्रत्येक अनिश्चय से कुछ नष्ट होता हैं
    प्रत्येक निषेध से कुछ खाली |

    उत्तर देंहटाएं
  2. Bkaaul ek shayer kehna chhaoonga-
    KAUN JEETA HAE ZULF KE SAR HONE TAK
    N JANE KIS GALI MEN ZINDAGI KI SHAM HO JAYE

    ab kab tak intzar karenge ashkon ke rukne ka

    उत्तर देंहटाएं