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शनिवार, 10 मार्च 2012

इंसानियत का धर्म निभाता रहा


पठान के कपडे पहन
हिन्दू का लड़का 
बाज़ार में निकल पडा
मारो मारो को हल्ला सुना
घबरा कर भाग पडा
एक मुसलमान ने
घर का दरवाज़ा खोला
इशारे से
उसे अन्दर बुलाया
मौत के मुंह से बचाया
कुछ दिन घर में छुपा
कर रखा
उसके हिन्दू होने का
पता उसे चल चुका था
फिर भी प्यार से
खिलाता पिलाता रहा
सच्चा मुसलमान था
नफरत से
उसका वास्ता ना था
इंसानियत का धर्म
निभाता रहा
18-02-2012
192-103-02-12

5 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत बढ़िया........
    इंसान की औलाद है... इंसान ही होगा.........

    उत्तर देंहटाएं
  2. ek dhram hai yahi,insaaniyt.....bas issey nibha le'n to jeewan safal hai.sunder rachna.....

    उत्तर देंहटाएं
  3. बहुत बढ़िया
    सबसे बड़ा धर्म इंसानियत का है..
    सब समझ ले यह बात तो झगड़े ही न हो....

    उत्तर देंहटाएं
  4. बहुत बढ़िया !!!
    kalamdaan.blogspot.in

    उत्तर देंहटाएं
  5. नफरत से
    उसका वास्ता ना था
    इंसानियत का धर्म
    निभाता रहा

    इंसान का धर्म इंसानियत ही हो सकता है और दूसरा नहीं ।
    प्रेरक कविता।

    उत्तर देंहटाएं