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बुधवार, 28 मार्च 2012

खुशी का लम्हा लम्हा वक़्त के समंदर में डूब गया

खुशी का लम्हा लम्हा
वक़्त के 
समंदर में डूब गया
यादों के 
सहरा में बदल गया 
हर अपना 
वादे से मुकर गया
तन्हाई में 
अकेला छोड़ गया
ज़िन्दगी का 
लम्हा लम्हा ठहर गया 
उम्मीद का चाँद 
ग़मों के बादलों खो गया
फलक पर उम्मीद का 
एक तारा भी
टिमटिमाता नहीं दिखता
जो जीने का सबब बन जाए 
अब रह गया 
सिर्फ आसरा खुदा का
पहले भी कई बार
उसने ही निकाली
किश्ती तूफान से 
इस बार भी वो ही
निकालेगा
खुशी के कुछ पल तो
लौटाएगा
सुकून का अहसास तो 
कराएगा
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर 
25-02-2012
248-159-02-१२
सुकून,वक़्त,यादें,खुशी

6 टिप्‍पणियां:

  1. पर उम्मीद का दामन ...कभी नहीं छुटा

    उत्तर देंहटाएं
  2. किश्ती तूफान से
    इस बार भी वो ही
    निकालेगा
    खुशी के कुछ पल तो
    लौटाएगा
    सुकून का अहसास तो
    कराएगा..
    sach sabkuch usi uparwale ke haath mein hota hai..ham to matra katputle hain..
    sundar rachna

    उत्तर देंहटाएं
  3. आज 15/05/2012 को आपकी यह पोस्ट http://nayi-purani-halchal.blogspot.com पर पर लिंक की गयी हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

    उत्तर देंहटाएं
  4. वाह! बहुत खुबसूरत एहसास पिरोये है अपने......

    उत्तर देंहटाएं