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रविवार, 18 मार्च 2012

हमने उन्हें चारागर समझा


हमने उन्हें
चारागर समझा
ज़ख्मों पर
मुनासिब मरहम लगा दें
उम्मीद में
हाल-ऐ-दिल बता दिया
नहीं पता था
दिल उन्ही से लगा लेंगे
ठीक होने की बजाय
बीमार-ऐ-इश्क भी
हो जायेंगे
ग़मों का बोझ बढ़ा लेंगे
सुकून की जगह
मुस्तकिल गम पाल लेंगे
22-02-2012
218-129-02-12
  चारागर =Doctor,मुस्तकिल=Permanent, मुनासिब  =Appropriate

4 टिप्‍पणियां: