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मंगलवार, 20 मार्च 2012

क्या और करूँ?



प्रभु कैसा
ये न्याय तुम्हारा 
जो इतना सताते हो
कब चैन दोगे मुझको?
क्या और करूँ?
तुम्हारी कृपा पाने को
प्रयत्न बहुत किया
सफलता
फिर भी ना मिली 
निरंतर
दिल में रखा तुम्हें
नित्य पूजा करी
हर काम वही करा
जो तुम्हें पसंद है
फिर भी
कृपा ना की तुमने
क्या त्रुटि हुयी मुझसे
इतना ही बता दो
क्या और करूँ?
तुम्हारी कृपा पाने को
इतना तो बता दो
23-02-2012
225-136-02-12

5 टिप्‍पणियां:

  1. प्रभु की लीला कोई न समझ पाया

    उत्तर देंहटाएं
  2. वाह प्रभु तेरी ये माया ...कहीं धूप तो कहीं हैं छाया

    उत्तर देंहटाएं
  3. प्रभु की महिमा कोई न जाने...!!

    उत्तर देंहटाएं
  4. बहुत अच्छी रचना...बधाई स्वीकारें

    नीरज

    उत्तर देंहटाएं