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शनिवार, 10 मार्च 2012

जीवन में जब अंधियारा हो

जीवन में
जब अंधियारा हो
ह्रदय तलाशता 
कोई सहारा हो
मन व्यथा में रोता हो
कोई अजनबी ऐसा
मिल जाए
हाल सुन खुद रो जाए
तुम्हें सीने से लगा ले
न थके न रुके जब तक 
तुम्हें हँसा ना दे
साथ देता रहे  
मत पूँछिये ऐसे
अजनबी को
क्या कहिये ?
मसीहा कहिये
या खुदा कहिये
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर

खुदा,मसीहा,व्यथा,दुःख  

18-02-2012

191-102-02-12

8 टिप्‍पणियां:

  1. मगर ऐसे लोग बहुत कम होते हैं......आंसू नहीं पोछता कोई। सुंदर भाव..

    उत्तर देंहटाएं
  2. दूसरों का दर्द बाँटे ऐसे कहाँ मिलते हैं आजकल...

    हरकीरत हीर जी ने लिखा है-आजकल सब बिकता है-दर्द के सिवा....

    बहुत सुन्दर भाव ....
    सादर.

    उत्तर देंहटाएं
  3. बहुत अच्छी प्रस्तुति!
    इस प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार के चर्चा मंच पर भी होगी!
    सूचनार्थ!

    उत्तर देंहटाएं
  4. कोई ऐसा मिल जाए तो वाकई मसीहा ही होगा ... सुंदर प्रस्तुति

    उत्तर देंहटाएं
  5. कोई अजनबी ऐसा
    मिल जाए
    सुन हाल तुम्हारे
    रो जाए...
    मसीहा ही हो सकता है....
    सुन्दर रचना...
    सादर.

    उत्तर देंहटाएं
  6. सुंदर भाव,अच्छी प्रस्तुति!

    उत्तर देंहटाएं
  7. ऐसे लोगों को हर दिन का प्रकाश ढूढ़ता है।

    उत्तर देंहटाएं