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सोमवार, 19 मार्च 2012

कितना भी छुपाऊँ ,छुपा नहीं पाता


कितना भी छुपाऊँ
छुपा नहीं पाता
दर्द-ऐ-दिल
चेहरे पर नज़र
आ ही जाता
हकीकत जानने की
कोशिश में
कोई ना कोई
पूँछ ही लेता
दुखती रग को
छेड़ देता
दर्द को बढ़ा देता
कितना भी छुपाऊँ
छुपा नहीं पाता
22-02-2012
223-134-02-12

2 टिप्‍पणियां: