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सोमवार, 5 मार्च 2012

आपसे रूबरू मिल कर...


हम रात भर सोते रहे
सपनों की दुनिया में
उन्हें ढूंढते  रहे
मगर आज वो आये नहीं
वक़्त-ऐ-सहर
भारी मन से आँखें खोली
तो वो सामने खड़े थे
मुस्कराकर कहने लगे
सपनों में रोज़ मिलते थे 
हमने सोचा
निरंतर इंतज़ार को
हमेशा के लिए ख़त्म
कर दें
आपसे रूबरू मिल कर
आपकी मोहब्बत को
क़ुबूल कर लें
आपके सब्र का
अब और इम्तहान
ना लें
16-02-2012
176-87-02-12

4 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा आज के चर्चा मंच पर की गई है। चर्चा में शामिल होकर इसमें शामिल पोस्ट पर नजर डालें और इस मंच को समृद्ध बनाएं.... आपकी एक टिप्पणी मंच में शामिल पोस्ट्स को आकर्षण प्रदान करेगी......

    उत्तर देंहटाएं
  2. खूबसूरत एहसासों की लेखनी ....वाह बहुत खूब

    आपका इंतज़ार रंग लाया
    सपनो में आ कर मिलने वाला
    आपके सामने तो आया ....

    उत्तर देंहटाएं
  3. वाह!!!प्यारे एहसासों से सजी रचना..
    आपकी होली शुभ हो...

    उत्तर देंहटाएं