ADVERTISEMENT

Bookmark and Share

Register To Recieve Latest Poems On Your Email or Mobile

Enter your email address:

Click Here To Subscribe On Mobile Bookmark and Share

सोमवार, 12 मार्च 2012

दौड़ेगा मन उधर ही जहां चैन मिलेगा


दौड़ेगा मन उधर ही
जहां चैन मिलेगा
भागेगा ह्रदय उधर ही
जहां प्यार मिलेगा
याद उसी की आयेगी
जो हँस कर बोलेगा
चाहेगा उसी को जो
मन की व्यथा सुनेगा
भायेगा वही जो
समस्या सुलझाएगा
याद रखेगा उस को जो
हिम्मत होंसला बढ़ाएगा
हो जाएगा उसी का
जो ज़िंदगी को
मुस्कान से सजाएगा
दौड़ेगा मन उधर ही
जो दिल-ओ-जान से
दोस्त का फ़र्ज़ निभाएगा
डा.राजेंद्र तेला निरंतर
दोस्त,ज़िंदगी,जीवन  

19-02-2012
197-108-02-12

4 टिप्‍पणियां:

  1. तभी तो कहा है...

    चले जा, चले जा, चले जा....
    जहाँ प्यार मिले...

    उत्तर देंहटाएं
  2. आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा आज के चर्चा मंच पर की गई है।
    चर्चा में शामिल होकर इसमें शामिल पोस्ट पर नजर डालें और इस मंच को समृद्ध बनाएं....
    आपकी एक टिप्‍पणी मंच में शामिल पोस्ट्स को आकर्षण प्रदान करेगी......

    उत्तर देंहटाएं
  3. मन तो बहुधा अशान्ति में ला पटकता है, बहुत समझाना पड़ता है उसे।

    उत्तर देंहटाएं