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रविवार, 25 मार्च 2012

छुप जाओगे समय की गहराइयों में एक दिन



सूरज की तरह अस्त
हो जाओगे एक दिन तुम
शिखर से धरती पर 
उतर जाओगे तुम
समय की गहराइयों में 
छुप जाओगे तुम 
क्यूं घमंड रखते हो 
बैर से जीते हो तुम 
इंसान सा व्यवहार
नहीं करते हो तुम
क्यों सत्य से 
मुंह चुराते हो तुम 
काल के गाल में समा
जाओगे एक दिन
मिल जुल कर रह लो  
प्यार से हँस बोल लो 
सब को बराबर समझ लो
मनुष्य बन कर जी लो तुम 

© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
24-02-2012
236-147-02-12

5 टिप्‍पणियां:

  1. सत्य है ये जीवन का.....
    वक्त रहते चेतो...

    सादर.

    उत्तर देंहटाएं
  2. behad sunder ......satik sarthak post , sach ka aaina .. hardik badhai , bahut pasand aayi rachna .

    उत्तर देंहटाएं