ADVERTISEMENT

Bookmark and Share

Register To Recieve Latest Poems On Your Email or Mobile

Enter your email address:

Click Here To Subscribe On Mobile Bookmark and Share

सोमवार, 26 मार्च 2012

जब जहर पीते रहना है,घुट घुट कर जीना है


कुछ करूंगा तो भी
तोहमत लगेगी
ना करूंगा तो भी
तोहमत लगेगी
हर बार गुनाहगार
कहलाऊंगा
खुद को सवालों से
घिरा पाऊंगा
बार बार बेगुनाही
साबित करनी पड़ेगी
जब
जहर पीते रहना है
घुट घुट कर जीना है
तो क्यों परवाह करूँ
लोगों की
जिस को जो भी
समझना है समझ ले
जो भी मानना है
मान ले
ना हारा कभी
ना अब हारूंगा
करूंगा वही जो मेरा
ईमान कहता है
मेरा ज़मीर मेरे साथ है
मेरा खुदा मेरे साथ है

25-02-2012
239-150-02-12

5 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत बढ़िया सर....

    जिस को जो भी
    समझना है समझ ले
    जो भी मानना है
    मान ले
    ना हारा कभी
    ना अब हारूंगा
    करूंगा वही जो मेरा
    ईमान कहता है
    मेरा ज़मीर मेरे साथ है
    मेरा खुदा मेरे साथ है

    आपकी ये रचना भा गयी.....
    सादर.

    उत्तर देंहटाएं
  2. बस ज़मीर ज़िन्दा है तो और क्या चाहिये।

    उत्तर देंहटाएं
  3. जिस को जो भी
    समझना है समझ ले
    जो भी मानना है
    मान ले
    ना हारा कभी
    ना अब हारूंगा
    वाह ...‍बहुत ही बढि़या।

    उत्तर देंहटाएं
  4. मेरा ज़मीर मेरे साथ है
    मेरा खुदा मेरे साथ है !!

    bas itna hi kafi hai.....!!

    उत्तर देंहटाएं