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रविवार, 25 मार्च 2012

उसकी चाहत में


रात पूरे शवाब पर थी
वो बेचैनी से उसके
इंतज़ार में कभी उठ कर
नीचे सड़क को
कभी दरवाज़े को देखती
उसे नहीं आना था
सो नहीं आया
हमेशा की तरह
वादा कर के मुकर गया
उसकी चाहत में
जानते हुए भी
वो उसकी लुभावनी
बातों आ गयी थी
दिल के
हाथों मजबूर थी
 24-02-2012
233-144-02-12

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