ADVERTISEMENT

Bookmark and Share

Register To Recieve Latest Poems On Your Email or Mobile

Enter your email address:

Click Here To Subscribe On Mobile Bookmark and Share

शनिवार, 10 मार्च 2012

कौन समझाए इन्हें?


इन आँखों ने देखे
बेहद खूबसूरत नज़ारे
कल कल करते झरने
रंग बिरंगे फूल,
ऊंचे सुन्दर पहाड़
भाँती भाँती के जानवर
नयनाभिराम पक्षी
फिर भी
इनकी इच्छा पर
विराम नहीं लगता
नित नया
देखने की चाहत में
कुछ ना कुछ खोजती
रहती हैं
कभी विश्राम नहीं करती
सोचती होंगी
सदा के लिए
बंद होने से पहले ही
सब कुछ
अपने अन्दर समेट लें

कौन समझाए इन्हें?
इच्छाएं अनंत होती हैं
संसार की उत्पत्ती के
समय से
किसी की पूरी नहीं हुयी
इनकी
कैसे पूरी हो जायेगी
हो सकता है
आँखें जब नश्वर नहीं रहेंगी
अमरत्व पा जायेंगी
इनकी इच्छा भी पूरी
हो जायेंगी 
18-02-2012
190-101-02-12

4 टिप्‍पणियां:

  1. लालसा सा कोई अंत नहीं....

    अनंत की उड़ान ही देगी मुक्ति...
    सार्थक रचना...
    सादर.

    उत्तर देंहटाएं
  2. इच्छाएं अनंत हैं ...जिसका सच में कोई अंत नहीं हैं ..मरते दम तक

    उत्तर देंहटाएं
  3. नित नयी इच्छायें जन्म लेती हैं।

    उत्तर देंहटाएं