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गुरुवार, 8 मार्च 2012

क्यूं इतना नाराज़ मुझसे ?


खुदा से पूछता हूँ
क्यूं इतना नाराज़ मुझसे ?
उसे गम दे कर
मुझे भी तड़पाता है
उसके साथ मुझे भी
रुलाता है
क्यूं नहीं बक्श देता उसे
दे देता
सजायें उसके हिस्से की
मुझको ही सारी
वैसे ही सह रहा हूँ
कुछ और सह लूंगा
कम से कम उसको तो
खुश देख लूंगा
दर्द में भी सुकून
पा लूंगा
18-02-2012
186-97--02-12

6 टिप्‍पणियां:

  1. .

    वाह डॉक्टर साहब ,
    क्या कमाल का जज़्बा है … महबूब को ख़ुश देख कर दर्द में भी सुकून पाना हर किसी के बस में नहीं होता…
    सलाम !

    होली की भी मंगलकामनाएं स्वीकार करें

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    ♥होली ऐसी खेलिए, प्रेम पाए विस्तार !♥
    ♥मरुथल मन में बह उठे… मृदु शीतल जल-धार !!♥



    आपको सपरिवार
    होली की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं !
    - राजेन्द्र स्वर्णकार
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  2. kya bai hai....dard me bhi sukun....ap hi likh sakte hai

    उत्तर देंहटाएं
  3. वाह क्या बात हैं...प्यार हो तो ऐसा कि प्यार की खातिर हर दर्द भी हैं कबूल

    उत्तर देंहटाएं
  4. प्यार की खातिर हर दर्द कबूल हैं....
    क्या बात हैं...

    उत्तर देंहटाएं