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रविवार, 18 मार्च 2012

तुम याद रखो ना रखो

आँखों से 
दूर हो भी जाओगे
तो दिल से नहीं 
उतरोगे
इतने खुदगर्ज़ नहीं
भूल जायेंगे तुम्हें
हम इतने
बदतमीज तो नहीं
तहजीब ही भूल जाएँ
चाहा है तुम्हें दिल से
चाहते रहेंगे
इतने बेदिल भी नहीं
खुद अपने दिल से
खेलेंगे
तुम याद रखो 
ना रखो
वो अलग बात है
22-02-2012
217-128-02-12

10 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत प्रस्तुति...
    आपके इस सुन्दर प्रविष्टि की चर्चा कल दिनांक 19-03-2012 को सोमवारीय चर्चामंच पर भी होगी। सूचनार्थ

    उत्तर देंहटाएं
  2. तुम याद रखो ना रखो,वो अलग बात है—
    दिल का मामला है,खूबसूरत.

    उत्तर देंहटाएं
  3. तुम याद रखो ना रखो,वो अलग बात है—
    दिल का मामला है,खूबसूरत.

    उत्तर देंहटाएं
  4. तुम याद रखो
    ना रखो
    वो अलग बात है..waah bahut shi kha .

    उत्तर देंहटाएं
  5. अपने भाव के साथ कलम की कोई ज्यादती न करते हुए लिखे गए मन के सुन्दर भाव बहुत सुन्दर :)

    उत्तर देंहटाएं
  6. इतने बेदिल भी नहीं
    खुद अपने दिल से
    खेलेंगे
    तुम याद रखो
    ना रखो
    वो अलग बात है

    गहरी बात कहती हुई एक अच्छी कविता।

    उत्तर देंहटाएं