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गुरुवार, 15 मार्च 2012

क्या होगा ?कब होगा? कैसे होगा ?


क्या होगा ?
कब होगा? कैसे होगा ?
के भंवर में
डूबते रहते हैं हम
अपने आज का
सत्यानाश करते हैं हम
हँसने की जगह
रोते हैं हम
हम कितनों को याद
करते हैं
जो कोई याद करेगा
हमको
याद करे ना करे कोई
फिर भी चिंता में डूबे
रहते हैं हम  
क्यूं भविष्य की बात
करके
परेशान होते हैं हम ?
वक़्त किसका रहा है
जो हमारा रहेगा
काल के गाल में
नाम हमारा भी
गुम हो जाएगा
एक दिन 

© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
20-02-2012
207-118-02-12

7 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सच कहा है..सुंदर प्रस्तुति..

    उत्तर देंहटाएं
  2. आशंका चिंता-भँवर, असमंजस में लोग ।

    चिंतामणि की चाह में, गवाँ रहे संजोग ।



    गवाँ रहे संजोग, ढोंग छोडो ये सारे ।

    मठ महंत दरवेश, खोजते मारे मारे ।



    एक चिरंतन सत्य, फूंक चिंता की लंका ।

    हँसों निरन्तर मस्त, रखो न मन आशंका ।।

    उत्तर देंहटाएं
  3. आप आयें --
    मेहनत सफल |

    शुक्रवारीय चर्चा मंच
    charchamanch.blogspot.com

    उत्तर देंहटाएं
  4. bahut saarthak vichar jhalak rahe hain post me bahut achchi prastuti.

    उत्तर देंहटाएं