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सोमवार, 26 मार्च 2012

शौक-ऐ-इश्क अभी गया नहीं


आँखों की चमक 
अश्कों को नहीं भायी
दिल की खुशी
बेदिलों को नहीं भायी
मन का सुकून
दुश्मनों को नहीं भाया
हर तरफ से हमें
निशाना बनाया गया
किस्मत का हर तीर
निशाने पर लगा
अपना पराया हो गया
अश्कों ने बहना शुरू
कर दिया
दिल दर्द से तड़पने लगा
सुकून सपना हो गया
होंसला
फिर भी टूटा नहीं
शौक-ऐ-इश्क अभी
गया नहीं
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर 

शायरी,
25-02-2012
241-152-02-12

3 टिप्‍पणियां:

  1. BAHUT KHOOB
    ISHQ KA SAROOR NAHIN BHOOLNA ITNA AASAN,
    YEH ISHQ HI TO HAE JO HUMEN ZINDA RAKHE HAE

    उत्तर देंहटाएं
  2. bahut khoob...
    ishq kabhi tootata nahin....
    aur jo toot jaye vo ishq nahin....
    bas rukh badal jata hai......!

    उत्तर देंहटाएं