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सोमवार, 5 मार्च 2012

हँसमुखजी ने खेली होली,मस्ती में खाली भांग की गोली (हास्य कविता)


हँसमुखजी ने खेली होली
मस्ती में 
खाली भांग  की गोली
भांग ने 
दिखाया अपना रंग
हँसमुखजी  ने
हाथ में लिया  चंग
मचाने लगे हुडदंग 
साली को 
कह दिया जानेमन
 बीबी को 
आंटीजी कह दिया
बीबी का 
हाथ झटक दिया
साली को 
गले से लगा लिया
बीबी साली एक 
हो गयी
चढ़ायी दोनों ने
त्योरियां
साली ने पकडे हाथ
बीबी ने  पकड़ी टांग
ठन्डे पानी के हौद में
हँसमुखजी को फैंक दिया
कमर में लगी चोट
जोश पड गया ठंडा
नशा  हो गया मंद
पड गया रंग में भंग
लग गयी उनको ठण्ड
ऊपर से बीबी ने
कर दिया खाना बंद
फिर लगवाए 
गिन गिन कर पूरे 
ढेड सौ डंड
हँसमुखजी ने खायी 
सौगंध
अब होली पर नहीं 
खायेंगे
जीवन में कभी भंग
03-03-2012
288-23-03-12

4 टिप्‍पणियां:

  1. लगता है भंग जादा घोंट गये महाराज.

    उत्तर देंहटाएं
  2. वाह जी बहुत बढिया ......

    होली मुबारक हो आपको भी ...हंसमुख जी की तरह

    उत्तर देंहटाएं