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शनिवार, 25 फ़रवरी 2012

ना ग़मों से दुश्मनी ना सुकून से दोस्ती


ना ग़मों से दुश्मनी
ना सुकून से दोस्ती
यही क्या कम है
ज़िंदा हूँ अब तक
कलम मेरी
अब भी रोशन
सच लिखती है 
मन की बात कहती है 
लोगों की 

फितरत  बताती है 
रिश्तों की 

हकीकत दिखाती है 
कैसे किसी को पसंद
आऊँगा?
कैसे मिलेगा सुकून?
दोस्ती ग़मों से ही होगी
गर लिखूंगा सच 
© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
11-02-2012
154-65-02-12

3 टिप्‍पणियां:

  1. dosti gamo se nahi khusiyon se honi chahiye .........:)
    sach kadva hi sahi par bahut accha hota hai ek kadvi dawa jo sab thik kar deti hai .

    उत्तर देंहटाएं
  2. बहुत ही खूबसूरत पंक्तियां डा. साहब

    उत्तर देंहटाएं
  3. मन को कुछ उद्गार मिले हैं,
    भटकन को भी द्वार मिले हैं,

    उत्तर देंहटाएं