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गुरुवार, 16 फ़रवरी 2012

“पीया नहीं आये” (हास्य कविता)

एक धुरंधर गायिका
संगीत के कार्यक्रम में
निरंतर दस मिनिट से
पूरी ताकत और जोश से
पीया नहीं आये
पीया नहीं आये
का अलाप ले रही थी
पहली बार
शास्त्रीय संगीत का
कार्यक्रम सुन रहे
हँसमुखजी से
रहा नहीं गया
खड़े हो कर दहाड़े
कुछ और भी गाओ
इतनी देर में तो पीया से
घर जा कर मिल कर
चली आती
गायिका से हँसमुखजी का
ताना बर्दाश्त नहीं हुआ
भड़क कर
ऊंची आवाज़ में बोली
समझते नहीं हो
पीया के साथ मोटर साइकिल
पर आ रही थी
मोटर साइकिल पंक्चर
हो गयी थी
मैं ऑटो से आ गयी
घंटा भर हो गया
पीया अब तक
क्यों नहीं आये?
उनकी चिंता
सता रही है
इसलिए  इतनी देर से
अलाप ले रही थी
मेरे तो पीया खो गए
आपको गाने की
सूझ रही है
07-02-2012
116-27-02-12

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