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शनिवार, 4 फ़रवरी 2012

खुदा की ये कैसी मर्जी है



खुदा की ये कैसी मर्जी है
ज़िन्दगी अज़ब मोड़ पर खडी है
इक तरफ खिजा का आलम
दूसरी तरफ बहार छा रही है
कभी लबों पर मुस्कान आती
कभी आँखें नम हो जाती है
कभी हँस हँस कर बातें होती
कभी जुबां लडखडाने लगती है
अब खुदा से सिर्फ एक अर्जी है
चाहे तो मुझ से हँसी छीन ले
आँखों की नमी भी साथ ले ले
मेरा सुकून मुझे वापस दे दे
इत्मीनान से जीने दे

© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
26-01-2012
82-82-01-12

10 टिप्‍पणियां:

  1. sukun hi maangiye khuda se...
    aur chain se jiyen..
    bhavnaayen hi bhavnaaye.....

    उत्तर देंहटाएं
  2. jis haal me khuda rakhta hai rahna padta hai.khuda se iltaja achchi lagi.

    उत्तर देंहटाएं
  3. Bhaavnao se paripurn.....Jab bhi mai Induravisinghj ki kavita dekhti hoo to aapka comment hamesha padti hoo...aap usi tarah kavita me hi bahut accha comment dete hai....

    उत्तर देंहटाएं
  4. अब खुदा से सिर्फ एक अर्जी है
    चाहे तो मुझ से हँसी छीन ले
    आँखों की नमी भी साथ ले ले
    मेरा सुकून मुझे वापस दे दे
    निरंतर इत्मीनान से जीने दे

    behad sundar srijan ......shukun khan vapas ata hai.....hajar minnton ke bad bhi gayab hi rahata hai Nirantar ji.....sach me shukun ab ak kalpna bhr rah gya hai.

    उत्तर देंहटाएं
  5. Mahendra Gupta guptamkgupta@gmail.com to me

    show details 3:04 PM (8 minutes ago)

    sundar rachna , sundar prastuti

    उत्तर देंहटाएं