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मंगलवार, 7 फ़रवरी 2012

रंग बिरंगी चिड़िया एक दिन बोली मुझसे


रंग बिरंगी चिड़िया एक दिन बोली मुझसे
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रंग बिरंगी चिड़िया 
एक दिन बोली मुझसे 
निरंतर खूब लिखते हो मुझ पर 
कभी मुझसे भी तो पूछ लो 
क्या लिखना है मुझ पर ? 
क्या सहती हूँ ? कैसे जीती हूँ ? 
कैसे उडती आकाश में ?
आज मैं ही सुनाती हूँ 
मेरी कहानी 
पहले ध्यान से सुन लो 
फिर जो मन में आये लिख लो 
पेड़ पर टंगे कमज़ोर से नीड़ में 
माँ ने अंडे को सेया 
तो मेरा जन्म हुआ
जीवन लेने को आतुर 
दुश्मनों से बचा कर 
किसी तरह माँ ने 
पाल पास कर बड़ा किया 
मुझे सब्र का पाठ पढ़ाया
जब तक खुद को 
सम्हाल नहीं सकूं तब तक 
उड़ने को मना किया
पहले फुदकना सिखाया 
कुछ अनुभव के बाद मुझे 
उड़ना सिखाया 
तिनकों से बने नीड़ में 
आंधी,तूफ़ान,
भीषण गर्मी और शीत में 
निरंतर जीवन जिया 
नीड कई बार उजड़ा 
माँ ने हताश हुए बिना 
हर बार अथक परिश्रम से
नया नीड बनाया 
सदा चौकन्ना रहने का 
महत्त्व बताया 
मुझे आत्म रक्षा का 
उपाय सुझाया 
अनुभव ना ले लूं जब तक 
नीड़ से दूर जाने को 
मना किया
माँ ने संतुष्ट रहना 
सिखाया
अपने सामर्थ्य के अनुरूप
जीने का मार्ग दिखाया 
माँ जो भी करती थी 
उन्होंने मुझे भी सिखाया
अब ,एक बात तुम से भी
पूछ लूं 
क्यों मनुष्य बच्चों को सब्र से 
जीने के लिए कहता 
परन्तु खुद बेसब्र रहता 
संतान से
संयम रखने को कहता 
खुद व्यवहार में उत्तेजित होता 
अनेकानेक कामनाएं
रखता 
पर निरंतर असंतुष्ट रहता 
संतान को भी असंतुष्ट बनाता
सदा अनुभव की बात करता 
स्वयं अनुभव हीन सा
काम करता 
अपने सामर्थ्य को नहीं
पहचानता 
सब कुछ पास होते हुए भी 
होड़ में जीता रहता
अति शीघ्र हताश हो जाता 
अगर लिखना ही है तो 
यह भी सब लिखना
मेरे रंग और सुन्दरत़ा पर 
सब लिखते हैं 
तुम से प्रार्थना है 
तुम तो मेरा सच लिखना
मेरे जीवन से कुछ
तुम भी सीखना  
डा.राजेंद्र तेला"निरंतर"
31-01-2012
89-89-01-12

5 टिप्‍पणियां:

  1. माँ ने संतुष्ट रहना
    सिखाया
    अपने सामर्थ्य के अनुरूप
    जीने का मार्ग दिखाया
    माँ जो भी करती थी
    उन्होंने मुझे भी सिखाया
    अब ,एक बात तुम से भी
    पूछ लूं
    क्यों मनुष्य बच्चों को सब्र से
    जीने के लिए कहता
    परन्तु खुद बेसब्र रहता
    संतान से
    संयम रखने को कहता
    खुद व्यवहार में उत्तेजित होता
    अनेकानेक कामनाएं
    रखता .............bahut hi marmik post .naman aapko

    उत्तर देंहटाएं
  2. जिंदगी ...के इतने बड़े सच को ...कितने सरल शब्दों में समझा दिया आपने ...वाह ...नमन हैं आपकी सोच और आपकी कलम को

    उत्तर देंहटाएं
  3. वटवृक्ष में पढ़ी आपकी यह कविता, बहुत अच्छी लगी, बधाई!

    उत्तर देंहटाएं
  4. Blogger Madhuresh said...

    बहुत प्यारी कविता, और गहन संदेश भी!

    February 10, 2012 10:28 AM
    Blogger अनुपमा पाठक said...

    रंग बिरंगी चिड़ियाँ के सत्य का सुन्दर बयान!

    February 10, 2012 10:37 AM
    Blogger Rajesh Kumari said...

    Rajendra Nirantar ji ki ek alag si par vishesh prernadayak kavita.chidia ke madhyam se bahut hi saarthak baat kahi hai.

    February 10, 2012 10:49 AM
    Blogger Vibha Rani Shrivastava said...

    एक माँ की सच्ची तस्वीर बनाते-बनाते ,

    इंसानों की कडवी फितरत दिखलाती रचना.... !

    February 10, 2012 11:07 AM
    Blogger vidya said...

    बहुत सुन्दर...
    एक अनदेखा नजरिया...

    February 10, 2012 12:10 PM
    Blogger वन्दना said...

    सच बयान करती सुन्दर रचना

    February 10, 2012 12:40 PM
    Blogger सदा said...

    अक्षरश: सच कहती यह अभिव्‍यक्ति ... आभार ।

    February 10, 2012 2:27 PM
    Blogger babanpandey said...

    सुन्दर पोस्ट ॥ बधाई

    February 10, 2012 6:15 PM
    Blogger इस्मत ज़ैदी said...

    बहुत सुंदर !
    चिड़ियों के माध्यम से मानवीय अधीरताओं और अन्यायों की बेहतरीन अभिव्यक्ति !!
    बधाई हो राजेंद्र जी!

    February 10, 2012 6:21 PM
    Blogger mridula pradhan said...

    पर उसकी भी अपनी व्यथा है .....sabki apni-apni.

    February 10, 2012 10:07 PM
    Blogger अरूण साथी said...

    एक यथार्थ, जिन्दगी लाइव

    February 11, 2012 9:58 AM
    Blogger Anupama Tripathi said...

    सबकी अपनी अपनी व्यथा ...अपना अपना प्रारब्ध है ...
    सुंदर रचना ...

    February 11, 2012 3:56 PM

    उत्तर देंहटाएं