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शुक्रवार, 10 फ़रवरी 2012

मुकद्दर


हाल-ऐ-मुकद्दर
कैसे बयान करूँ
मुस्कारा कर रह
जाता हूँ
खुल कर हंस नहीं
सकता
सिसक कर रह
जाता हूँ
दर्द बयाँ कर नहीं
सकता
देख सकता हूँ
गले से लगा नहीं
सकता
आवाज़ सुन सकता हूँ
मिल नहीं सकता
दिल में रखता हूँ
कह नहीं सकता

डा.राजेंद्र तेला,निरंतर 
01
-02-2012
96-06-02-12

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