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शुक्रवार, 17 फ़रवरी 2012

आरजू अभी मिटी नहीं


शिकवा शिकायत 
किसी सेनहीं
किस्मत ही कुछ ऐसी है
जो समझ सके मुझको
ऐसा कोई मिला ही नहीं
आरजू अभी मिटी नहीं
होंसला भी कम हुआ नहीं
उम्मीद अब भी बाकी है
कहीं तो कोई कली
ऐसी भी होगी
जो अब तक कहीं
खिली नहीं
मेरे दिल के बगीचे में
आकर बस जायेगी
मुझे अपना समझ
अपनायेगी
मेरे सब्र का सिला देगी
अपनी महक से
मुझे सरोबार करेगी
चेहरे को मुस्काराहट से
सजायेगी
07-02-2012
120-31-02-12

5 टिप्‍पणियां:

  1. किसी से
    शिकवा शिकायत नहीं
    किस्मत ही कुछ ऐसी है
    जो समझ सके मुझको
    ऐसा कोई मिला ही नहीं
    बहुत अच्छी प्रस्तुति,बेहतरीन रचना,...

    उत्तर देंहटाएं
  2. वाह जनाब आज तो ऐसा लगा जैसे अपनी ही कहानी पढ़ रहा हूँ ।

    उत्तर देंहटाएं
  3. यह हौसला है तो आरजू ज़रूर पूरी होगी..बहुत सुंदर

    उत्तर देंहटाएं