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रविवार, 26 फ़रवरी 2012

सुकून चाहता हूँ


शाम के धुंधलके में
मुरझाये चेहरे
नम आँखों से
दरवाज़ा खोला तो
वो सामने खड़े थे
यकीन नहीं आया
आँखों को मला
फिर से
देखा तो वो ही थे
चेहरा दमकने लगा
दिल की
धड़कन बढ़ने लगी
सांसें तेज़ हो गयी
जब से
नाराज़ हो कर गए
आज पहली बार आये थे
बहुत उम्मीदों से पूछा
कैसे हैं ?
अब फिर तो नहीं जायेंगे
दिल तो नहीं दुखाएँगे
वो धीरे से बोले
कुछ सामान रह गया था
 वो लेने आया हूँ
अभी फ़ौरन लौट जाऊँगा
अब दिल का
सौदा नहीं करता
सुकून चाहता हूँ

डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
12-02-2012
156-67-02-12

5 टिप्‍पणियां:

  1. मुश्किल है...
    फिर होगी आहट...
    फिर बंधेगी उम्मीद...

    उत्तर देंहटाएं
  2. बहुत सुन्दर प्रस्तुति
    आपकी इस सुन्दर प्रविष्टि की चर्चा कल दिनांक 27-02-2012 को सोमवारीय चर्चामंच पर भी होगी। सूचनार्थ

    उत्तर देंहटाएं
  3. इस एहसास में सकूंन की चाहना सिर्फ कहने भर के लिए है. मनोदशा का भाव सुन्दर शब्दों में अभिव्यक्त है.

    उत्तर देंहटाएं