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सोमवार, 6 फ़रवरी 2012

मदहोश

वो अपने हुस्न में
इतना मदहोश हैं
उन्हें ख्याल ही नहीं 
हम रोज़ ख़्वाबों में
उनसे मिलते हैं
उनसे गुफ्तगू करते हैं
हर जिस चीज़ के लिए
वो होश में ना करते हैं
ख़्वाबों में
खुद पहल करते हैं
हमारी हसरतों को
बड़े अंदाज़ से
अंजाम तक पहुंचाते हैं
30-01-2012
87-87-01-12

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