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सोमवार, 6 फ़रवरी 2012

इक और रात फिर यूँ ही गुजर जाती

ख्याल मेरे
चेहरा उनका होता था
ख़्वाबों में निरंतर
उन्हें देखता 
उनसे बात करता
हाल-ऐ-दिल बयान
करता
वो बेखबर अदाएं
बिखेरती रहती 
मैं उन्हें दिल में
ज़ज्ब करता रहता 
हसरतें मचलने लगती 
सांसें तेज़ होने लगती 
हिम्मत भी बढ़ने लगती 
अरमानों की मंजिल पर
कदम रख लूं
उनका हाथ थाम लूं
उससे पहले ही नींद
टूट जाती
सौत बन कर
बीच आ खड़ी होती
बहारों की तमन्ना
खिजा में बदल जाती
इक और रात फिर
यूँ ही गुजर जाती
30-01-2012
86-86-01-12

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