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बुधवार, 29 फ़रवरी 2012

यूँ ही नहीं याद करते लोग कबीर,रहीम को


यूँ ही नहीं
याद करते लोग
कबीर,रहीम को
लिखना है तो
वो बात लिखो
जो सब को समझ
आ जाए
पढ़ा नहीं साहित्य
जिसने
वो भी समझ जाए
ऐसा लिखना पढ़ना
किस काम का
न जोड़ सके कोई
अपने जीवन से
न काम किसी के आए
© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर

13-02-2012
164-75-02-12

9 टिप्‍पणियां:

  1. bilkul sahi socha hai rachna ke madhyam se bahut pate ki baat kahi hai.

    उत्तर देंहटाएं
  2. लिखना है तो
    वो बात लिखो
    जो सब को समझ
    आ जाए....sahi bat kahi.

    उत्तर देंहटाएं
  3. सत्य वचन, बुकस्मार्ट होने और ज़मीनी सच्चाई समझने में अंतर है।

    उत्तर देंहटाएं