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शनिवार, 25 फ़रवरी 2012

चाहे मंदिर जाओ या मस्जिद जाओ

न कर्मों की सज़ा होती
न ही कोई पुरस्कार होता
केवल परिणाम होता
सपनों की दुनिया से
बाहर आ जाओ
पुरस्कार की चाहत में
कुछ ना करो
केवल परिणाम से डरो
चाहे मंदिर जाओ या
मस्जिद जाओ
कुछ फर्क नहीं पड़ता
बस इतना से जान लो
इश्वर से कुछ नहीं छुपता 
बस वैसा ही करो
जैसा उसको अच्छा लगता

डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
11-02-2012
152-63-02-12

9 टिप्‍पणियां:

  1. बस वैसा ही करो
    जैसा उसको अच्छा
    लगता

    सार्थक संदेश देती रचना

    उत्तर देंहटाएं
  2. सर ,सच कहा एकदम

    बस इतना से जान लो
    इश्वर से
    कुछ नहीं छुपता ....

    उत्तर देंहटाएं
  3. चाहे मंदिर जाओ या
    मस्जिद जाओ
    कुछ फर्क नहीं पड़ता
    बस इतना से जान लो
    इश्वर से
    कुछ नहीं छुपता

    गहन सत्य है इन पंक्तियों में.......बहुत ही सुन्दर।

    उत्तर देंहटाएं
  4. बहुत अच्छी प्रस्तुति!
    इस प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार के चर्चा मंच पर भी होगी!
    सूचनार्थ!

    उत्तर देंहटाएं
  5. ना कर्मों की
    सज़ा होती
    ना ही कोई
    पुरस्कार होता
    केवल परिणाम
    होता .............sach kaha ....behatarin post . no samiksha ........only ...........:):):):):):)

    उत्तर देंहटाएं
  6. इश्वर से
    कुछ नहीं छुपता
    बस वैसा ही करो
    जैसा उसको अच्छा
    लगता

    सच्ची बात...
    सादर.

    उत्तर देंहटाएं
  7. सहज सरक सीधा सन्देश .आभार .

    उत्तर देंहटाएं