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गुरुवार, 9 फ़रवरी 2012

मेरे दर्द को सुनता है कोई


वक़्त  के
 इस दौर में
जब कहने से 
फुर्सतनहीं किसी को 
खुशकिस्मत हूँ
मेरे दर्द को
सुनता है कोई
दूर से ही सही
हंसाता है कोई
ग़मों से निजात
ना दिला सके भले ही 
फिर भी टूटे दिल को
जोड़ता है कोई
सूखे दरिया में
पानी बहाता है कोई
ठहरी हुयी ज़िन्दगी में
रवानी लाता है 
कोई
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर 
01-02-2012
94-04-02-12

9 टिप्‍पणियां:

  1. कोई ना कोई चाहिए ही ...ऐसा जीवन में.

    सुन्दर..

    उत्तर देंहटाएं
  2. वाह सर ,,
    क्या लिखते है आप ...
    इस रचना पर एक गीत याद आ गया
    " कोई न कोई चाहिए प्यार करनेवाला "
    बहुत बेहतरीन ,सुन्दर रचना...

    उत्तर देंहटाएं
  3. दूर से ही सही
    मुझे हंसाता है कोई...

    very nice !!

    उत्तर देंहटाएं
  4. दो घड़ी वो जो पास आ बैठे......!!

    उत्तर देंहटाएं
  5. किसी दोस्त का आसपास होना या उसके होने का अहसास वाकई एक बड़ा संबल है

    उत्तर देंहटाएं