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रविवार, 19 फ़रवरी 2012

अब थक गया हूँ


अब थक गया हूँ
समझ नहीं आता
किस से पूँछू
क्यों ऐसी किस्मत
लेकर आया हूँ ?
गम-ऐ-दिल अब
तूँ ही बता मैं क्या करूँ
कैसे हाले-ऐ-दिल
बयान करूँ
कब तक रोता रहूँ ?
ग़मों का
बोझ ढोता रहूँ
किस की पूजा
इबादत करूँ?
किस रास्ते पर चलूँ ?
बचा वक़्त
सुकून से काट सकूँ
कुछ लम्हे
हँस कर जी सकूँ
09-02-2012
131-42-02-12  

2 टिप्‍पणियां:

  1. वाह!!!!!राजेन्द्रजी,..बहुत अच्छी प्रस्तुति, अच्छी रचना ,....

    MY NEW POST ...सम्बोधन...

    उत्तर देंहटाएं
  2. उत्तर तो स्वयं अपना हृदय ही देगा!
    सुन्दर रचना!

    उत्तर देंहटाएं