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सोमवार, 27 फ़रवरी 2012

पुरानी कहानी फिर दोहरा गया

बड़ी मुश्किल से
थमे थे आंसू
क्यूं कोई आकर
फिर रुला गया
खामोशी से
दिल थामे बैठा था
क्यूं बुझी आग
फिर भड़का गया
मुश्किल से खुद को
सम्हाला था
क्यों फिर कोई
ज़हन्नुम में पहुंचा गया
खुदा के नाम पर
वफाई की 
कसमें खाई थी 
क्यूँ फिर कोई
बेवफाई दिखा गया
हँसते हुए को फिर
 रुला गया
पुरानी कहानी फिर
दोहरा गया
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
12-02-2012
159-70-02-12

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