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मंगलवार, 28 फ़रवरी 2012

गलती मेरी ही थी


बहुत दिन
बाद नज़र आयी
सुन्दर साड़ी
हाथों में हीरे की चूड़ियाँ
चमचमा रही थी
हँस हँस कर लोगों से
बातें कर रही थी
मगर चेहरे की चमक
धुंधली पड चुकी थी
सुर्ख लाल आँखें
अलग कहानी कह रही थी
रात भर सोयी ना थी
दिल की
हकीकत बता रहीं थी
बेवफाई की
कीमत चुका रहीं थी
हमें देखा तो पास आयीं
सर झुका कर
नम आँखों से बोली
मुझे माफ़ कर दो
गलती मेरी ही थी
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर    

13-02-2012
162-73-02-12

6 टिप्‍पणियां:

  1. क्या कर सकते हैं, सब स्वतन्त्र हैं..

    उत्तर देंहटाएं
  2. aaj kal to galti karke maante bhi nahi hai log,aap ki rachna ki naayika na mana to sahi

    उत्तर देंहटाएं
  3. कर दीजिए माफ...पश्चाताप के आँसू भी तो देखिये..

    उत्तर देंहटाएं
  4. जब लौटे तब सवेरा ..
    अच्‍छी प्रसतुति !!

    उत्तर देंहटाएं
  5. बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
    घूम-घूमकर देखिए, अपना चर्चा मंच
    लिंक आपका है यहीं, कोई नहीं प्रपंच।।
    --
    आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा आज बुधवार के चर्चा मंच पर लगाई गई है!

    उत्तर देंहटाएं