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रविवार, 12 फ़रवरी 2012

कोई अजनबी जब ज़िन्दगी में आ जाए


कोई अजनबी  
जब ज़िन्दगी में आ जाए
तसल्ली से बात सुन ले
आँखों के आंसू पोंछ दे
ज़ख्मों पर 
मरहम लगा दे
दिल की तकलीफें कम कर दे
होठों को
हँसी से सज़ा दे
चेहरे की रौनक लौटा दे
समझ लूँगा

खुदा ज़मीं पर उतर आया
जिसकी तलाश में 

ज़िंदगी भर भटकता रहा 
वो अपनामिल गया
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
03-02-2012
102-12-02-12

5 टिप्‍पणियां:

  1. कोई अपना मिल गया, यानी खुदा मिल गया !!
    बहुत अच्छी कविता।

    उत्तर देंहटाएं
  2. चेहरे की हंसी जो बरक़रार रखने में सहयोग दे सके वह खुदा से कम नहीं है. इस सुंदर प्यार भरी रचना मन को प्रसन्न करती है.

    आभार इस सुंदर प्रस्तुति के लिये.

    उत्तर देंहटाएं
  3. sach aaj ke daur mein kisi ke honthon par hansi laana aasan kaam nahi
    ..bahut sundar

    उत्तर देंहटाएं
  4. हमें इंतज़ार है उसका.... बहुत सुंदर।

    उत्तर देंहटाएं
  5. Par aaj woh khuda mile tab bat hai na,intjar hai ,rahega uska
    uttam prastuti

    उत्तर देंहटाएं