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शनिवार, 11 फ़रवरी 2012

तुम्हें बदलना होगा ........

एक दफनाई हुयी
आवाज़ से कम नहीं
मेरी आवाज़
कितना भी चिल्लाऊं
कोई सुनता ही नहीं
निरंतर आवाज़ लगाता हूँ
अब तो बदल जाओ
इच्छा रखते हो
जैसा तुम चाहते हो
वैसा ही हो जाए
जो तुम कहो सब मान लें
पर तुम नहीं बदलोगे
किसी की नहीं सुनोगे
किसी की नहीं मानोगे
इतना स्वार्थ मत रखो
तुम चाहते हो
तुम्हारी भावनाओं का
ध्यान रखा जाए
तुम्हारी कामनाओं को
पूरा करा जाए
अपने ह्रदय से पूछों
यह कैसे
संभव हो सकता है ?
क्यों भूल जाते हो
कुछ पाने के लिए
कुछ देना पड़ता है
दूसरों की भावनाओं का
ध्यान रखना पड़ता है
उनकी बात को भी
सुनना पड़ता है
अब समय आ गया है
इच्छाओं को 
पूरा करना है तो 
ह्रदय के बंद कपाट को
खोलना होगा
हँसकर दूसरों को भी
सुनना होगा
उनकी भावनाओं का भी
सम्मान करना होगा
उन्हें गले लगाना होगा
तुम्हें बदलना होगा
        तुम्हें बदलना होगा .......
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर 
02-02-2012
99-09-02-12

5 टिप्‍पणियां:

  1. बेहतरीन भाव पूर्ण सार्थक रचना,

    उत्तर देंहटाएं
  2. सच है..कुछ पाने के लिए
    कुछ देना पड़ता है...
    बेहतरीन रचना....

    सादर.

    उत्तर देंहटाएं
  3. ECHHAON KO PURA KARNA HAI, TO HARDYA KE BAND KAPAT KO KHOLNA HOGA,
    HANS KAR DOOSRON KO BHI SUNANA HOGA,UNKI BHAVNAON KA SAMMAN BHI KARNA HOGA

    WAJIB HAI EK SANATAN SACHHAIE, EK UMDA PRASTUTI

    उत्तर देंहटाएं
  4. पर दुसरो के लिए करते करते कई बार हम सिर्फ एक कठपुतली मात्र नहीं हो जाते हैं क्या ?.........पोस्ट अच्छी है आपकी।

    उत्तर देंहटाएं