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गुरुवार, 9 फ़रवरी 2012

बड़ी अजीब रात थी

बड़ी अजीब रात थी
इक तरफ चाँद की ठंडक
दूसरी तरफ उनके  
हुस्न की गर्मी
इक तरफ हमारी ख्वाईशें
दूसरी तरफ उनकी ना नुकर
रात यूँ ही बीत रही थी
ठंडी हवा भी कह रही थी
क्यों आगे ना बढ़ रहे हो
कब तक शरमाओगे 
इसी ज़द्दोज़हद में रात
गुजर गयी
हसरतें अधूरी रह गयीं
ना उन्हें ना हमें 
सुकून -ऐ-मोहब्बत 
मिल सका 
© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
01-02-2012
92-02-02-12

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