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सोमवार, 6 फ़रवरी 2012

मुझ से खुश कोई ना मिला


हालात से परेशाँ
सुकून की तलाश में
घर से निकल पडा
जहां भी 
हँसते चेहरे को देखा
खुश रहने का नुस्खा
पूछने लगा 
हर शख्श रो रो कर
गम बयाँ करने लगा
हर तरफ
गम का माहौल था 
हर शख्श
इक ज़िंदा लाश से
कम ना था 
दिखाने की होड़ में 
झूठ ही हंस रहा था
हकीकत का पता
चल चुका था
मुझ से खुश
कोई ना मिला
उलटे पैर
अपनों के बीच 
लौट चला
जो जैसा भी था
उसे गले लगा लिया 
सुकून से रहने लगा

डा.राजेंद्र तेला"निरंतर"
26-01-2012
84-84-01-12

1 टिप्पणी:

  1. हकीकत का पता
    चल चुका था
    मुझ से खुश
    कोई ना मिला
    उलटे पैर
    अपनों के बीच
    लौट चला
    जो जैसा भी था
    उसे गले लगा लिया
    फिर सुकून से
    रहने लगा .......................वाह बहुत खूब

    ये ही हम सब का सबसे बड़ा सच हैं ......

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