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रविवार, 5 फ़रवरी 2012

आज के दिन का बड़ा हसीन आगाज़ था


आज के दिन का
बड़ा हसीन आगाज़ था
वक़्त-ऐ-सहर
कानों को मिला सुकून
उनकी आवाज़ का
लगा जैसे
कोई मस्ती के आलम में
डूबा हुआ
मधुर साज़ बजा रहा है
मेरे दिल से सुर में सुर
मिला रहा है
बड़े मन से अपना प्यार
बरसा रहा है
आज के दिन का
बड़ा हसीन आगाज़ था
26-01-2012
83-83-01-12

8 टिप्‍पणियां:

  1. आज का हि नही आने वाला हर दिन
    हंसी का आगाज लेकर आये
    सुंदर रचना :-)

    उत्तर देंहटाएं
  2. hasin din ke aagaz ki bdhaai...ishvar karen din ka anzaam bhi khushiyon bhra ho...

    उत्तर देंहटाएं
  3. डॉक्टर साब ये किस खास दिन का जिक्र है और क्या आगाज हुआ?

    सुंदर भावनात्मक प्रस्तुति. अभिनन्दन.

    उत्तर देंहटाएं
  4. हर दिन का आगाज़ ऐसा ही हो...सुंदर भावपूर्ण रचना..

    उत्तर देंहटाएं
  5. बहुत सुन्दर प्रस्तुति
    आपकी इस सुन्दर प्रविष्टि की चर्चा कल दिनांक 06-02-2012 को सोमवारीय चर्चामंच पर भी होगी। सूचनार्थ

    उत्तर देंहटाएं
  6. ये हसीन आगाज़ यूँ ही कायम रहे ..हमेशा

    उत्तर देंहटाएं
  7. din to achha gujar gaya ...pr kal bhi ye agaj yun hi bana rahe nirantar ji ...badhai.

    उत्तर देंहटाएं