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शनिवार, 4 फ़रवरी 2012

मेरी उम्मीदों को कायम रहने दें



 उनके घर के
करीब पहुँचते ही
दिल की
धडकनें बढ़ जाती
दिल में ज़ज्ब उम्मीदें
करवटें लेती
उनके घर की तरफ
निगाहें उठ ही जाती
वो नज़र आ जाए
देख कर मुस्कारा दें
मेरे अरमानो को
रफ़्तार दे दें
अगर गुरेज हो
उन्हें मुस्काराने से
तो बस मुझे देख लें
देखने से भी गुरेज हो
अगर उनको
तो मुझे ही जी भर के
देख लेने दें
मेरी उम्मीदों को
कायम रहने दें
मुझे इंतज़ार में
जीने दें
24-01-2012
79-79-01-12

5 टिप्‍पणियां:

  1. वाह...
    बहुत सुन्दर...
    देखने से भी गुरेज हो
    अगर उनको
    तो मुझे ही जी भर के
    देख लेने दें...

    प्यारी सी अभिव्यक्ति..
    सादर.

    उत्तर देंहटाएं
  2. Ummeed pe duniya kaayam hai....
    aapki ummed poori ho...
    Ameen...!!

    उत्तर देंहटाएं
  3. सुन्दरता से लिखा है ..
    kalamdaan.blogspot.com

    उत्तर देंहटाएं