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बुधवार, 1 फ़रवरी 2012

एक बार फिर हम पर तेज़ाब डाला गया



एक बार फिर  
हम पर 
तेज़ाब डाला गया
हम पर
लांछन लगाया गया
हमारे हृदय को
झुलसाया गया
चेहरे पर चेहरा चढ़ा
बताया गया
उन्होंने भी वही किया
जो अब तक लोगों ने किया
वही समझा जो
अब तक लोगों ने समझा
कसूर उनका नहीं
हमारी किस्मत का है
झुलसे चेहरे को छुपा कर 
रखने का गुनाह जो करते हैं
निरंतर हँसते रहते हैं
नए दोस्त बनाते हैं
उनसे गले लग कर मिलते हैं
साफ़ दिल का होते हुए भी 
मनों में शक पैदा करते हैं
शक ने दुनिया को मारा
हमको भी मार ले 
क्या फर्क पड़ता
झुलसे चेहरे पर
नया चेहरा चढ़ा लेंगे
मन में रोते रहेंगे
दिखाने को  हँसते रहेंगे

© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
22-01-2012
72-72-01-12

2 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत ही सुन्दर रचना..सच को खूबसूरती से प्रस्तुत करते हैं आप..

    उत्तर देंहटाएं
  2. हम आह भी करते हैं तो हो जाते हैं बदनाम
    वो कत्ल भी करते हैं तो चर्चा नहीं होता।

    उत्तर देंहटाएं