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गुरुवार, 23 फ़रवरी 2012

क्षणिकाएं -13

उम्मीद

लोगों से उम्मीद
नहीं करता हूँ
नफरत का सामान
इकट्ठा करने का
शौक नहीं रखता हूँ
*************
खुशी की चाह
खुशी की
चाह रखने से पहले
खुश रहना ज़रूरी
सोचने का तरीका
बदलना ज़रूरी
*************
क्रिकेट
जीत गए तो
सर पर उठा लो
हार गए तो
गालियों से नवाजो
क्रिकेट के खेल को
केवल खेल समझो
हार जीत को
ज़ज्बात से मत
जोड़ो
*************
जीत गए तो
जीत गए तो
बहुत मेहनत करी
हार गए तो मेहनत
नहीं करी होगी
*************
हार कर जीतना
हार कर जीतना
लगन
मेहनत से संभव
सदा जीतते रहना
अधिक कठिन
************
दुखी-सुखी
दुखी मन
सुखी रहना
चाहता
सुखी मन
भी सुखी रहना
चाहता
********
खुदगर्जी
 सब मेरी प्रशंसा करें
जो ना करें
मैं उस से नफरत करूँ
मैं सबसे आगे रहूँ
मुझ से आगे कोई
ना रहे
10-02-2012
144-55-02-12

9 टिप्‍पणियां:

  1. लोगों से उम्मीद
    नहीं करता हूँ
    नफरत का सामान
    इकट्ठा करने का
    शौक नहीं रखता हूँ

    bahut badhiya...
    sabhi ek se badh kar ek..
    regards.

    उत्तर देंहटाएं
  2. नफरत का सामान
    इकट्ठा करने का
    शौक नहीं रखता हूँ
    kya baat kahi hai aapne..

    उत्तर देंहटाएं
  3. सभी क्षणिकाएं अच्छी हैं..
    kalamdaan.blogspot.in

    उत्तर देंहटाएं
  4. लोगों से उम्मीद
    नहीं करता हूँ
    नफरत का सामान
    इकट्ठा करने का
    शौक नहीं रखता हूँ

    ....सुंदर और सार्थक क्षणिकाएं...

    उत्तर देंहटाएं
  5. नफरत का सामान
    इकट्ठा करने का
    शौक नहीं रखता हूँ
    वाह ...बहुत ही बढि़या।

    उत्तर देंहटाएं
  6. बहुत खूब...सुस्पष्ट अभिव्यक्ति..

    उत्तर देंहटाएं