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बुधवार, 25 जनवरी 2012

तुम्हारे आने का वक़्त होता

तुम्हारे
आने का वक़्त होता
मेरा सोच ठहर जाता
जहन में कुछ और नहीं
सूझता
सूरज निकलने के पहले
आकाश लाल हो जाता
मेरा भी चेहरा
वैसे ही दमकने लगता
ह्रदय का 
स्पंदन बढ़ने लगता
नहीं आते हो जब तक
बादल सूरज को ढक कर
चमक को बुझा देते
वैसे ही बुझने लगता
आशा निराशा के भावों
से विचलित होता
तुम्हारे आने का
वक़्त होता!!!!!!
17-01-2012
48-48-01-12

2 टिप्‍पणियां: