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शुक्रवार, 27 जनवरी 2012

क्यों मिलता फिर बिछड़ता कोई


क्यों मिलता फिर बिछड़ता कोई
===========
जितना
याद करता हूँ
उतना ही 
ख्यालों में खोता हूँ
भावों के भंवर में
गोता लगाता हूँ
अतीत की नदी में
अविरल बहता हूँ
ह्रदय का स्पंदन
मन की उलझन
बढाता हूँ
निरंतर सोचता हूँ 
क्यों मिलता
फिर बिछड़ता कोई
उत्तर की प्रतीक्षा में
जीता जाता हूँ
© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
19-01-2012
60-60-0112
यादें,जीवन,बिछड़ना.

5 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुन्दर....

    आखरी पंक्ति में शायद दोनों बार जीता लिखा है वहाँ -जीता जाता लिखना चाह रहे थे आप ???
    सादर.

    उत्तर देंहटाएं
  2. उत्तर की प्रतीक्षा में............

    shaayad prateeksha hi laazmi hai !

    उत्तर देंहटाएं
  3. बहुत सुन्दर पंक्तिया है ...

    उत्तर देंहटाएं
  4. बहुत सुन्दर,सार्थक प्रस्तुति।

    ऋतुराज वसंत पंचमी की हार्दिक शुभकामनाएँ।

    उत्तर देंहटाएं