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बुधवार, 18 जनवरी 2012

खुद का युद्ध


कोई कितनी भी
हमदर्दी जता दे
कंधे पर हाथ रख दे
साथ में आंसू बहा ले
कोई काम नहीं आता
खुद का दर्द
खुद को ही सहना
पड़ता
भाग्य से खुद को ही
जूझना पड़ता
जीवन के थपेड़ों को
खुद ही सहना पड़ता
खुद का युद्ध खुद को ही
लड़ना पड़ता
डा.राजेंद्र तेला"निरंतर", 
10-01-2012
28-28-01-12

4 टिप्‍पणियां:

  1. bahut saarthak prastuti.khud ka uddh khud ko hi ladna padta hai.

    उत्तर देंहटाएं
  2. खुद का युद्ध खुद को ही
    लड़ना पड़ता..
    bilkul sahi kaha aapne...

    उत्तर देंहटाएं
  3. सच कहा...
    सार्थक प्रस्तुति..
    सादर.

    उत्तर देंहटाएं