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गुरुवार, 26 जनवरी 2012

दबे है दिल में दर्द बहुत


दबे है 
दिल में दर्द बहुत
खाए हैं ज़ख्म
अपनों से बहुत
जब भी मिलते हैं
गले लग कर मिलते हैं
फिर चुपके से वार
करते हैं
खुश हैं की ज़िंदा हैं
अब तक हम
अब भी उनसे
हंस कर मिलते हैं हम
घबराते नहीं कब फिर
ज़ख्मों से नवाज़ंगे
पहले भी सहे हैं
फिर सह लेंगे
निरंतर हँसते रहेंगे
लाख कोशिश कर लें
रोयेंगे नहीं हम
हिम्मत से लड़ते रहे हैं 
हिम्मत से 
लड़ते रहेंगे हम 
मोहब्बत से जीने की 

फितरत नहीं बदलेंगे हम
© डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
17-01-2012
55-55-01-12
E

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