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शुक्रवार, 13 जनवरी 2012

मत पूछो मुझ से मेरे दिल के अफ़साने

मत पूछो हम से
हमारे दिल के अफ़साने
करी नहीं मोहब्बत 
जिसने कभी 
वो दर्द- दिल क्या जाने
ना जानते ना पहचानते 
फिर भी मुस्करा कर 
देखा उन्होंने
खिला दिए मोहब्बत के
फूल दिल में
दिखा दिए ख्वाब रातों में
क्या कह रही दुनिया
हम बेखबर इस से
हो गए उनके दीवाने
कब मिलेंगे,पास बैठेंगे
बातें करेंगे,
मस्ती में झूमेंगे
इस ख्याल में 
अब डूबे हैं हम
कोई कहेगा
बीमार--इश्क हैं
क्या होता है इश्क 
जिसने किया वो
ही जाने
कब बुझेगी आग 
दिल की
अब खुदा जाने
हमें तो जीना है 
इंतज़ार में उनके 
आयेंगे या नहीं 
ये वो ही जाने

डा.राजेंद्र तेला,निरंतर  
06-01-2012
17-17-01-12

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4 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत बढ़िया!
    मकर संक्रान्ति की हार्दिक शुभकामनाएँ!

    उत्तर देंहटाएं
  2. aapki is sundar rachna pe ek sher nikal aaya..
    "ishq karke bhi ishq se anjaan hain hujoor..
    ya yun kahoon ye ishq ki pehchaan hai hujoor..."
    ..bahut sundar rachna Rajendra ji..

    उत्तर देंहटाएं
  3. bahut khoob .......yeh aafsane duniya hi jane ....kavi maan ko to bhaye wahi jo kalam kah jaye ..........bahut sunder rachna hai ......:)

    उत्तर देंहटाएं
  4. मत पूछो मुझ से
    मेरे दिल के अफ़साने

    करी नहीं मोहब्बत

    जिसने कभी
    वो दर्द-ऐ दिल क्या जाने


    "हाल दर्दे दिल का हम भी जानते हैं कुछ-कुछ
    हुआ यूँ है की हमने भी कभी मोहब्बत की है.."

    उत्तर देंहटाएं