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सोमवार, 9 जनवरी 2012

मोहब्बत के पिंजड़े में


मोहब्बत के
पिंजड़े में दिल
चुपचाप ग़मों को
सहता रहता
मजबूरी की
सलाखों के पीछे
दुखी होता रहता
इंतज़ार में
तड़पता रहता
उड़ने को बेचैन
मगर बेबसी में
परेशां होता रहता
कब पैगाम आयेगा ?
दीदार उसका होगा
निरंतर ख्यालों  में
डूबा रहता
उम्मीद में ना सो
पाता
ना जाग पाता
02-01-2012
08-08-01-12

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