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रविवार, 15 जनवरी 2012

नहीं जानता मैं चाहता क्या हूँ ?

नहीं जानता
मैं चाहता क्या हूँ
नए लोगों से मिलता हूँ
उन्हें अपना बनाना
चाहता हूँ 
पुरानों को अपने साथ
रखना चाहता हूँ
नए जब पुराने हो जाते
चेहरे साफ़ दिखने लगते
मुझे सवालों से घेरते
सच कह देता हूँ
सच पूछ लेता हूँ
चेहरे से पर्दा हटाने की
कोशिश में मुझसे
रुष्ट हो जाते हैं
खुद से लड़ता हूँ
खुद को समझाता हूँ
कैसे अपने साथ रखूँ
निरंतर सोचता हूँ
जितना मनाता हूँ
उतना ही दूर होता
जाता हूँ
असली चेहरे को
पहचाने लगता हूँ
नहीं जानता
मैं चाहता क्या हूँ
07-01-2012
20-20-01-12

4 टिप्‍पणियां:

  1. दिल में उसकी याद अब भी बाकि हैं

    उत्तर देंहटाएं
  2. It has been said befriend yourself first in order to be friend with others...
    swayam ko pahchanna aawashyak hai!
    shubhkamnayein:)
    sundar abhivyakti!!!

    उत्तर देंहटाएं
  3. आत्म चिंतन ही हर प्रश्न का जवाब है।

    उत्तर देंहटाएं
  4. सिर्फ इतना ही .............कल आज और कल ......कभी ना मिटने वाला सच

    उत्तर देंहटाएं